Bihar Election 2025: छठ से जुड़े इमोशन को वोट में बदलने की BJP की बड़ी प्लानिंग
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने कमर कस ली है, लेकिन फिलहाल बढ़त लेती दिख रही है भारतीय जनता पार्टी (BJP), जो इस बार बिहारी प्रवासियों के छठ प्रेम को अपने पक्ष में भुनाने की रणनीति पर काम कर रही है। बीजेपी का मानना है कि एक बिहारी चाहे दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न हो, छठ पूजा के लिए वो अपने गांव-घर लौटता ही है। और इस भावनात्मक जुड़ाव को बीजेपी चुनाव में वोट में तब्दील करना चाहती है।
छठ ही बनेगा वोट बैंक की चाबी?
बीजेपी की रणनीति साफ है – छठ पूजा को केंद्र में रखकर प्रवासी बिहारी वोटरों को टारगेट किया जाए। पार्टी की योजना है कि उसके नेता देशभर में फैले उन प्रवासी वोटरों से व्यक्तिगत संपर्क करें जो छठ के दौरान बिहार लौटते हैं। उनसे वोट डालने और बीजेपी को समर्थन देने की अपील की जाएगी। इसके लिए फोन कॉल्स, व्हाट्सएप संपर्क, घर-घर पहुंच जैसे कई माध्यमों का उपयोग किया जाएगा।
प्लानिंग की कमान चुग और गौतम के हाथ
इस पूरे मिशन की जिम्मेदारी बीजेपी ने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग और दुष्यंत गौतम को सौंपी है। ये दोनों नेता बिहार बीजेपी अध्यक्ष दिलीप जायसवाल के साथ मिलकर उन परिवारों की पहचान कर रहे हैं जो बिहार से बाहर रहते हैं। पार्टी ने 150 नेताओं की टीम गठित की है जो देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर इन प्रवासी बिहारी वोटरों को न केवल चुनाव के दौरान बिहार आने को कहेगी बल्कि उन्हें बीजेपी को वोट देने के लिए भी प्रेरित करेगी।
चुनाव आयोग की टाइमिंग पर नजर
बीजेपी की यह पूरी रणनीति चुनाव आयोग के ऐलान पर टिकी हुई है। छठ पूजा 2025 में 25 अक्टूबर को है, जबकि 2020 में बिहार चुनाव तीन चरणों में 28 अक्टूबर, 3 नवंबर और 7 नवंबर को हुए थे। इस बार अगर चुनाव इससे पहले नहीं हुए, तो बीजेपी के प्रयास पर पानी फिर सकता है। आयोग के पास यह विकल्प है कि चुनाव तारीखें छठ के आसपास इस तरह तय हों कि जो बिहारी अपने घर छठ में लौटे, वो वोटिंग में भी हिस्सा ले सके।
बिहार में सरकार वहीं की, जो बाहर के बिहारी तय करेंगे?
चौंकाने वाली बात ये है कि चुनाव आयोग के अनुसार बिहार में 24 जून 2025 तक कुल वोटरों की संख्या 7.89 करोड़ है, जिसमें से लगभग तीन करोड़ वोटर बिहार से बाहर रहते हैं। यानी 37% वोटर ऐसे हैं जो अगर एकमत होकर किसी एक पार्टी को वोट दें, तो सरकार बनना लगभग तय है। और यही वजह है कि बीजेपी की निगाह इस पूरे 3 करोड़ प्रवासी वोट बैंक पर है।
प्रचार अब बिहार में नहीं, बाहर होगा
बीजेपी की रणनीति कुछ हटकर है। पार्टी के कई नेता इस बार बिहार में नहीं, बल्कि दिल्ली, पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के उन जिलों में प्रचार करेंगे जहां बिहार के प्रवासी मजदूर और पेशेवर बड़ी संख्या में मौजूद हैं। ये नेता स्थानीय स्तर पर संपर्क कर इन वोटरों को समझाएंगे कि अगर छठ में वे बिहार लौट ही रहे हैं तो वोट देकर जाएं और बीजेपी को मौका दें।
रेलवे सुविधा और केंद्र की ताकत
केंद्र में बीजेपी की सरकार और बिहार में एनडीए के सहयोग से सरकार होने के कारण इस पूरी रणनीति को प्रशासनिक सहूलियत भी मिलने की उम्मीद है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र सरकार रेलवे को निर्देश दे सकती है कि छठ के समय विशेष ट्रेनों का संचालन हो ताकि प्रवासी वोटर आसानी से बिहार आ सकें। टिकटों में रियायत, स्पेशल ट्रेनें और सुरक्षा जैसे इंतजाम इस रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं
निष्कर्ष: वोटिंग और छठ – भावनाओं की सियासत
छठ पूजा सिर्फ एक त्योहार नहीं, बिहार की आत्मा है। बीजेपी इस बार उसी आत्मा से जुड़कर चुनाव की राजनीति करने की कोशिश कर रही है। चुनाव आयोग पर अब नजरें हैं कि वह छठ और चुनाव की तारीखों में सामंजस्य बैठा पाता है या नहीं। लेकिन इस बात में कोई शक नहीं कि अगर प्रवासी बिहारी वोटर वोटिंग में हिस्सा लेते हैं, तो बिहार की राजनीति की तस्वीर बदल सकती है।