Purnia News: जादू-टोना के शक में 5 लोगों की हत्या, मुख्य अभियुक्त गिरफ्तार, 150-200 अज्ञात पर केस, रीति-रिवाज से हुआ अंतिम संस्कार
पूर्णिया (बिहार): बिहार के पूर्णिया जिले में जादू-टोना के संदेह में दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। टेटगामा गांव में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की हत्या कर उनके शवों को जला दिया गया। यह घटना रविवार देर रात (06 जुलाई, 2025) की बताई जा रही है, जो सोमवार सुबह (07 जुलाई) को सामने आई और इलाके में हड़कंप मच गया।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू की और मुख्य अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके अलावा तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिसमें एक नाबालिग भी शामिल है
डीएम ने दी जानकारी: रीति-रिवाज से हुआ दाह-संस्कार
पूर्णिया के जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने मंगलवार (08 जुलाई) को मीडिया से बात करते हुए बताया,
एफआईआर दर्ज, 23 नामजद और 150-200 अज्ञात पर केस
डीएम ने बताया कि,
“मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। कुल 23 लोग नामजद आरोपी हैं और 150 से 200 अज्ञात लोगों पर भी केस दर्ज किया गया है। मुख्य अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया गया है और बाकी फरार लोगों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।”
उन्होंने आगे कहा कि पीड़ित परिवार को सरकारी सहायता और मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
क्या है पूरा मामला?
घटना मुफस्सिल थाना क्षेत्र के टेटगामा गांव की है। जादू-टोना के शक में गांव के कुछ लोगों ने 70 वर्षीय कातो देवी, 50 वर्षीय बाबू लाल उरांव, 40 वर्षीय सीता देवी, 25 वर्षीय मनजीत कुमार और 20 वर्षीय रानी देवी की निर्मम हत्या कर दी और उनके शवों को आग के हवाले कर दिया।
घटना के बाद सभी शव गांव के पास एक तालाब से बरामद किए गए।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मृतक बाबू लाल उरांव का 16 वर्षीय बेटा इस जघन्य हत्याकांड का चश्मदीद गवाह है।
गांव में तनाव, लोग फरार
घटना के बाद टेटगामा गांव में तनाव का माहौल है। प्रशासन की ओर से भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। गांव के कई लोग घटना के बाद से फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
निष्कर्ष
पूर्णिया की यह घटना ना केवल मानवता को शर्मसार करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि आज भी कुछ जगहों पर अंधविश्वास और सामूहिक हिंसा किस हद तक लोगों को क्रूर बना सकती है। प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई कर रहा है, लेकिन यह सवाल भी खड़ा करता है कि आखिर समाज को इस प्रकार की सोच से मुक्त कैसे किया जाए।