बिहार में दोहरे नामांकन पर सख्ती, निजी स्कूलों के 20 लाख छात्रों का आधार सीडिंग अनिवार्य
दोहरे नामांकन पर रोक लगाने के लिए बिहार शिक्षा विभाग ने बड़ा और ठोस कदम उठाया है। अब निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले लगभग 20 लाख छात्रों का आधार सीडिंग अनिवार्य किया जाएगा। इसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग रोकना और छात्रों का सटीक डाटा तैयार करना है।
शिक्षा विभाग के अनुसार, सरकारी स्कूलों में नामांकित 1.76 करोड़ छात्रों में से करीब 90 प्रतिशत का आधार सीडिंग पूरा हो चुका है। शेष 10 प्रतिशत बच्चों का आधार सीडिंग जनवरी माह तक पूर्ण कर लिया जाएगा। इसके लिए विभागीय स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
दोहरे नामांकन वालों पर कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो छात्र निजी विद्यालयों के साथ-साथ सरकारी स्कूलों में नामांकित पाए जाएंगे, उनका नाम सरकारी विद्यालयों से काट दिया जाएगा। पिछले वर्ष ऐसे 5 लाख 27 हजार छात्रों का नामांकन रद्द किया गया था। स्थायी समाधान के तौर पर अब निजी स्कूलों में भी आधार सीडिंग अनिवार्य की जा रही है।
जनवरी-फरवरी से राज्य के सभी मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में आधार सीडिंग के लिए विशेष कैंप लगाए जाएंगे। इस प्रक्रिया में निजी विद्यालयों को पूरा सहयोग करना होगा।
आरटीई कानून के अनुपालन पर जोर
राज्य में वर्तमान में 16,221 मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय संचालित हैं। शिक्षा विभाग ने शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून के सख्त क्रियान्वयन का संकेत देते हुए चेतावनी दी है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को 25 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश नहीं देने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द की जा सकती है।
शैक्षणिक सत्र 2019-20 से अब तक निजी विद्यालयों में आरटीई के तहत नामांकित बच्चों की पढ़ाई के लिए डीबीटी माध्यम से 125 करोड़ 71 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है। ज्ञानदीप पोर्टल पर पंजीकृत 3000 निजी विद्यालयों की जांच जारी है।
कमजोर वर्ग के नामांकन में बढ़ोतरी
सत्र 2024-25 में निजी विद्यालयों में कक्षा एक में 28,465 कमजोर वर्ग के बच्चों का नामांकन हुआ था, जबकि चालू सत्र 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 43,183 हो गई है। यानी लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
क्यों जरूरी है आधार सीडिंग
शिक्षा विभाग का मानना है कि आधार सीडिंग से न केवल दोहरे नामांकन पर रोक लगेगी, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ भी मिलेगा। सभी सहायता राशि सीधे छात्रों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। साथ ही छात्रों की जन्म तिथि, निवास, पारिवारिक और आर्थिक स्थिति से जुड़ा सटीक डेटा ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा।