पटना: सुबह की सैर, बच्चों की किलकारियाँ और शाम की सुकून भरी हवा—पार्क शहर के सामाजिक जीवन का अहम हिस्सा होते हैं। लेकिन हाल के दिनों में राजधानी पटना के कुछ पार्कों में सुरक्षा को लेकर सामने आई चिंताओं ने सरकार का ध्यान खींचा है। इन्हीं चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला किया है। अब पटना के सभी पार्कों में चरणबद्ध तरीके से सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि असामाजिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके और आम लोगों को सुरक्षित वातावरण मिल सके।
यह निर्णय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान लिया गया। सचिवालय स्थित कार्यालय कक्ष में हुई इस बैठक में राजधानी के पार्कों की सुरक्षा, रख-रखाव और जन-सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पार्क केवल हरियाली के स्थान नहीं हैं, बल्कि सामाजिक मेलजोल, स्वास्थ्य और मानसिक शांति के केंद्र भी हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा और सुविधाओं से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी प्रमुख और छोटे पार्कों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और उनकी नियमित मॉनिटरिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर
सुरक्षा के साथ-साथ बैठक में पार्कों की आधारभूत सुविधाओं पर भी खास ध्यान दिया गया। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पेयजल की समुचित व्यवस्था, स्वच्छता, साफ-सुथरे शौचालय और बैठने की सुविधाएं हर पार्क में अनिवार्य रूप से उपलब्ध हों। इसका उद्देश्य यह है कि बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और युवा—हर वर्ग के लोग बिना किसी परेशानी के पार्कों का उपयोग कर सकें।
विधायक के सुझाव पर बनी सहमति
सुरक्षा को लेकर कुम्हरार विधायक संजय कुमार गुप्ता ने पार्कों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने का सुझाव रखा। मंत्री ने इस सुझाव पर तुरंत सकारात्मक रुख अपनाते हुए अधिकारियों को आवश्यक प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया। माना जा रहा है कि कैमरे लगने के बाद न सिर्फ आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगेगी, बल्कि लोगों में सुरक्षा की भावना भी मजबूत होगी।
पार्क बनेंगे जागरूकता और जानकारी के केंद्र
सरकार की योजना पार्कों को केवल सुरक्षित ही नहीं, बल्कि ज्ञान और पर्यावरणीय जागरूकता के केंद्र के रूप में विकसित करने की भी है। मंत्री ने निर्देश दिया कि पार्कों में लगे पेड़ों और पौधों के नाम, उनकी विशेषताएं और उपयोग से जुड़ी जानकारी बोर्ड पर प्रदर्शित की जाए। इससे लोग प्रकृति के प्रति जागरूक होंगे और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।
हरियाली बढ़ाने की नई रणनीति
बैठक में हरियाली बढ़ाने को लेकर भी अहम निर्णय लिए गए। पटना-डोभी (गयाजी) राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर बड़े पैमाने पर पौधरोपण के लिए सर्वे कराने का निर्देश दिया गया। इस अभियान में फलदार पौधों को प्राथमिकता देने और स्थानीय किसानों को जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। मंत्री ने कहा कि किसानों की भागीदारी से किया गया पौधरोपण लंबे समय तक टिकाऊ होगा और इससे पर्यावरण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा।
लंबित प्रस्तावों के त्वरित निस्तारण के निर्देश
इसके अलावा वन (संरक्षण) अधिनियम के तहत लंबित प्रस्तावों की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे सभी मामलों का समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि विकास कार्यों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बना रहे।
कुल मिलाकर, सरकार के इन फैसलों से न सिर्फ पटना के पार्क अधिक सुरक्षित होंगे, बल्कि वे स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक जागरूकता के मजबूत केंद्र के रूप में भी विकसित हो सकेंगे।