कांग्रेस पटना साहिब में किसे उम्मीदवार बनाती है, यह देखना अहम होगा। वहीं, जनसुराज ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है और चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में जुटा है। दूसरी ओर, नंद किशोर यादव क्षेत्र से अपने जुड़ाव और विकास कार्यों की बदौलत एक बार फिर चुनाव मैदान में उतरने को तैयार हैं।
पटना साहिब, जो सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की जन्मस्थली है, व्यापारिक गतिविधियों के लिए भी मशहूर है। मारुफगंज, मंसूरचक, रामबाग और मच्छरहट्टा जैसे मोहल्लों में अनाज, मसाले, शृंगार सामग्री और छोटे खिलौनों की थोक मंडियां हैं। 2008 के परिसीमन के बाद पटना पूर्वी विधानसभा क्षेत्र का नाम बदलकर पटना साहिब कर दिया गया। कांग्रेस, जनसंघ और समाजवादी दलों के बीच बारी-बारी से सत्ता बदलती रही, लेकिन पिछले साढ़े तीन दशकों से यह सीट भाजपा का गढ़ बनी हुई है। नंद किशोर यादव 1995 से लगातार सात बार यहां से जीतते आ रहे हैं और वर्तमान में बिहार विधानसभा के अध्यक्ष हैं।
इस बार वह आठवीं बार चुनाव मैदान में उतरने वाले हैं। 1957 से अब तक हुए चुनावों में 1990 तक कांग्रेस ने यहां पांच बार जीत दर्ज की, जबकि जनसंघ, जनता पार्टी और जनता दल को भी सफलता मिली। लेकिन 1995 से नंद किशोर यादव ने इस सीट को भाजपा के नाम कर दिया। अब संभावना है कि यह सीट इंडिया गठबंधन में कांग्रेस के खाते में जाएगी और कांग्रेस भी लंबे समय बाद पूरी तैयारी के साथ मैदान में है।
2015 में नंद किशोर यादव को कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ा था, जब राजद, जदयू और कांग्रेस का महागठबंधन बना था। राजद ने उनके शिष्य रहे संतोष मेहता को टिकट दिया और नतीजा इतना करीबी रहा कि नंद किशोर यादव महज 2792 मतों से जीत पाए। 1995 से अब तक उनके सामने अलग-अलग दलों और चेहरों का मुकाबला रहा है।
कांग्रेस प्रत्याशी प्रवीण सिंह कुशवाहा का कहना है कि नंद किशोर यादव का कद भले ही बड़ा हो, लेकिन पटना साहिब का विकास अपेक्षाओं के अनुसार नहीं हो पाया। शहर में आवागमन की कठिनाइयाँ, जलजमाव और अपराध की समस्याएं अब भी बनी हुई हैं।
वहीं, नंद किशोर यादव का कहना है कि वे जात-पात से ऊपर उठकर विकास की राजनीति करते हैं। उनके मुताबिक, पटना साहिब में 125 करोड़ रुपये की लागत से सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है, मंगल तालाब का सौन्दर्यीकरण शुरू होने वाला है और गंगा पाथ से लोगों को जाम से राहत मिली है।
पांच साल में हुए कुछ प्रमुख बदलाव
- जेपी गंगा पथ का दीदारगंज तक विस्तार
- पटना घाट समेत कई सड़कों का निर्माण
- आवागमन सुविधाओं में सुधार
विधानसभा सीट का इतिहास
- 1962 – जेहरा अहमद (कांग्रेस)
- 1967 – रामदेव महतो (भारतीय जनसंघ)
- 1969 – रामदेव महतो (भारतीय जनसंघ)
- 1972 – जमील अहमद (कांग्रेस)
- 1977 – रामदेव महतो (जनता पार्टी)
- 1980 – शरत कुमार जैन (कांग्रेस)
- 1985 – शरत कुमार जैन (कांग्रेस)
- 1990 – महताब लाल (जनता दल)
- 1995 से अब तक – नंद किशोर यादव (भाजपा)