बिहार SIR मामला: सुप्रीम कोर्ट ने गड़बड़ी पर हस्तक्षेप की चेतावनी दी, अगली सुनवाई 12 अगस्त को
नई दिल्ली। बिहार में मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि इस प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता पाई गई, तो वह हस्तक्षेप करने से नहीं हिचकेगा। इस मामले में अगली सुनवाई 12 और 13 अगस्त को होगी।
निर्वाचन आयोग को चेतावनी
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि वह कानून का पालन करे और पारदर्शिता बनाए रखे। उन्होंने कहा कि अगर कोई मृत व्यक्ति सूची में जीवित दिखाया गया है, तो याचिकाकर्ता ऐसे मामलों के साक्ष्य कोर्ट के सामने रखें।
याचिकाकर्ताओं को 8 अगस्त तक लिखित दलीलें देने का आदेश
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से 8 अगस्त तक अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने को कहा है। पीठ ने याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट नेहा राठी को नोडल वकील नियुक्त किया।
ADR ने उठाया सवाल
याचिकाकर्ताओं में शामिल एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21, 325 और 326 का उल्लंघन करती है। उन्होंने कहा कि 65 लाख से अधिक मतदाताओं को सूची से बाहर किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।
चुनाव आयोग की दलील
चुनाव आयोग की ओर से सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी ने कहा कि SIR प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 21(3) के तहत शुरू की गई है। आयोग ने शहरी पलायन, जनसांख्यिकीय बदलाव और बीते 20 वर्षों से पुनरीक्षण न होने की स्थिति को आधार बताया।
दस्तावेजों को लेकर कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने आधार और वोटर आईडी कार्ड को “प्रामाणिक दस्तावेज” मानते हुए कहा कि इन्हें मान्य माना जा सकता है। जबकि राशन कार्ड के बारे में कोर्ट ने कहा कि इसमें जालसाजी की अधिक संभावना होती है।
मसौदा सूची पर कोई रोक नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने मसौदा मतदाता सूची के प्रकाशन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और कहा कि वह मामले में अंतिम निर्णय देगा। चुनाव आयोग ने बताया कि मसौदा सूची वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है और सभी राजनीतिक दलों को इसकी प्रतियां भेज दी गई हैं।
आगे की कार्यवाही
- पहली सुनवाई: 12-13 अगस्त
- दूसरी सुनवाई (संभावित): सितंबर, जब अंतिम सूची तैयार हो जाएगी
- आपत्तियों का निपटारा: 15 सितंबर तक संभावित
- नोडल काउंसिल: एडवोकेट नेहा राठी (याचिकाकर्ता पक्ष)