बिहार वोटर लिस्ट विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने ड्राफ्ट सूची पर रोक से किया इनकार, आयोग को आधार और वोटर आईडी शामिल करने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बिहार में चुनाव आयोग द्वारा 1 अगस्त को जारी की जाने वाली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने चुनाव आयोग को यह निर्देश दिया है कि वह इस प्रक्रिया में आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड (EPIC) को पहचान के वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार करे। कोर्ट अब इस मुद्दे पर विस्तार से बहस के लिए मंगलवार को अगली सुनवाई की तारीख तय करेगा।
अदालत की टिप्पणी और आयोग की दलीलें
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से आधार, वोटर और राशन कार्ड को दस्तावेजों की सूची में शामिल करने पर विचार करने को कहा था। जवाब में आयोग ने कहा कि ये दस्तावेज फर्जी बनाए जा सकते हैं, इसलिए पूरी तरह भरोसेमंद नहीं हैं।
इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “धरती पर कोई भी कागज फर्जी बनाया जा सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आधार या वोटर आईडी को नकार दिया जाए।” कोर्ट ने यह भी कहा कि आयोग की सूची में दर्ज दस्तावेज भी निर्णायक नहीं हैं। कोर्ट ने मौखिक रूप से आयोग को राशन कार्ड छोड़कर आधार और वोटर आईडी को मान्य करने की सलाह दी।
आयोग की रिपोर्ट: बड़ी संख्या में मतदाता बदलाव
चुनाव आयोग ने बताया कि बिहार के 7.89 करोड़ मतदाताओं में से 7.24 करोड़ लोगों ने फॉर्म भरकर जमा कर दिया है, जो कुल का 91.69% है। इस दौरान:
- 22 लाख मृत वोटर (2.83%)
- 36 लाख अन्य राज्यों में चले गए मतदाता (4.59%)
- 7 लाख डुप्लीकेट नाम (0.89%)
ये आंकड़े चुनाव आयोग के अनुसार 100% सत्यापन दर्शाते हैं। 1 अगस्त को जब ड्राफ्ट सूची जारी होगी, तब आपत्तियां और दावे दर्ज कर छूटे हुए या गलत नामों में सुधार किया जा सकेगा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और विरोध
इस पूरे मुद्दे पर बिहार की राजनीति भी गर्म है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग सत्ताधारी पार्टी भाजपा के इशारे पर वोटरों के नाम काट रहा है। इसको लेकर महागठबंधन ने बिहार बंद का आयोजन किया था, जिसमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी शामिल हुए थे।
संसद भवन के बाहर विपक्षी सांसदों ने भी SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। इस बीच चुनाव आयोग ने विपक्ष के बयानों और ट्वीट्स का खंडन करते हुए कहा है कि प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी है।
अगली सुनवाई मंगलवार को
जस्टिस सूर्यकांत की प्रशासनिक व्यस्तताओं के कारण सोमवार को सिर्फ संक्षिप्त सुनवाई हो सकी। अब मंगलवार को इस मुद्दे पर विस्तृत बहस की तारीख तय की जाएगी, जब कोर्ट यह भी पूछेगा कि याचिकाकर्ता और आयोग की ओर से बहस में कितना समय लिया जाएगा।